
आज़ादी के बलिदानों से अन्याय
लेख को आरम्भ करने से पहले आप सभी पाठकों से एक प्रश्न कि ऊपर दिए हुए चित्र में से आप किस-किस क्रांतिकारी
लेख को आरम्भ करने से पहले आप सभी पाठकों से एक प्रश्न कि ऊपर दिए हुए चित्र में से आप किस-किस क्रांतिकारी
हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम सम्वत 2080 के पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के अभिजीत मुहूर्त में अर्थात इसाई कैलंडर के दिनांक 22 जनवरी 2024 दोपहर को अयोध्या में प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगीl इस दिन “हरि यानी विष्णु मुहूर्त” है, जो 41 साल बाद आया हैl
किसी भी देश कि भाषा और उस भाषा के शब्दकोश में उपस्थित शब्द उस समाज का चरित्र और मानसिकता के विषय में सहज ही बता देते हैं l हिन्दी तथा अन्य सभी क्षेत्रीय भारतीय भाषाएँ संस्कृतनिष्ठ हैं जिनका एक विशाल शब्दकोश है l किन्तु वर्तमान समय में उन भाषाओँ में अंग्रेजी और उर्दू शब्दों तथा उक्तियों का प्रयोग करते हैं क्योंकि कुछ शब्द शिक्षा के माध्यम से उनमें मिश्रित किये गए, कुछ प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कुछ विज्ञापनों, समाचारों, चलचित्रों के द्वारा l इन शब्दों का प्रभाव हमारे
फिर भी हम सभी ने “धर्म, मत, पंथ और संप्रदाय” नाम के शब्द तो सुने ही हैं लेकिन ये सब हैं क्या? संभवतः इससे हम सभी अभिनज्ञ ही हैं
तो चलो इस विषय को लेकर एक प्रयोग करते हैं :-
सरकारों द्वारा विभिन्न उपक्रमों जैसे बिजली, पानी, एलपीजी सिलिंडर आदि पर चलाये जा रहे कुछ “टेरिफ प्लान” जो अलग अलग राज्यों अलग अलग भाव के हैं जिसमें सीमाएं निर्धारित की हुई हैं कि 1-200 यूनिट तक 200-400 यूनिट और उससे ऊपर, इसी तरह जल का और रसोईघर के गैस सिलिंडर का ! इससे हमें यह लगता है कि इन टैरिफों से बिजली, जल और एलपीजी की खपत कम होगी लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि इसके प्रभाव परिवारों में पड़ते हैं
जैसा की हम जिज्ञासु प्रवृति के लोग जानते ही हैं कि भारत में भारतीय इतिहास को किस प्रकार छुपाया गया है l सत्य के उपासकों के देश भारत में कई सभ्यताए आई और यहीं दफ़न हो गईं किन्तु बीती शताब्दियों में जो सभ्यताएं भारत में आईं वे सभ्यताएं बर्बर थीं उनका उद्देश्य केवल अधिकार करना या राज करना ही नहीं था उनका उद्देश्य किसी भी देश की और वहां के रहने वालों की सभ्यता, संस्कृति और परम्पराओं को नष्ट कर अपनी संस्कृति को वहां के लोगों पर थोपना था, इसके लिए उन्हें जो करना था वह था उस स्थान के लोगों में एक हीन भावना उत्पन्न कर उनको नीचा दिखाना और अपनी श्रेष्ठता दिखा कर उन्हें मतांतरित करना l
गजवा-ए-हिन्द या भारत पर विजय :- इस्लाम की हदीस (सुन्नन नासाई : जिहाद की किताब) और कुछ इस्लामिक विद्वानों द्वारा भारत पर इस्लाम के कब्जे को पैग़म्बर मुहम्मद का एक सपना बताते हैं जिससे मुसलमानों के जन्नत जाने का रास्ता खुलेगा ! इस घोषणा में मुसलमानों और काफिरों के बीच भारत में एक युद्ध होगा जिसमें मुसलमानों की जीत होगी और भारत में इस्लाम का राज कायम हो जाएगा तथा भारत में पूरी तरह से शरिया के कानून (इस्लामिक नियम) लागु होंगे ।
इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमें सबसे पहले महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरु के नेताजी सुभाषचन्द्र बोस से संबंधों के विषय में जान लेना
लेख को आरम्भ करने से पहले आप सभी पाठकों से एक प्रश्न कि ऊपर दिए हुए
हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम सम्वत 2080 के पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के अभिजीत मुहूर्त में अर्थात इसाई कैलंडर के दिनांक 22 जनवरी 2024 दोपहर को अयोध्या में प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगीl इस दिन “हरि यानी विष्णु मुहूर्त” है, जो 41 साल बाद आया हैl
किसी भी देश कि भाषा और उस भाषा के शब्दकोश में उपस्थित शब्द उस समाज का चरित्र और मानसिकता के विषय में सहज ही बता देते हैं l हिन्दी तथा अन्य सभी क्षेत्रीय भारतीय भाषाएँ संस्कृतनिष्ठ हैं जिनका एक विशाल शब्दकोश है l किन्तु वर्तमान समय में उन भाषाओँ में अंग्रेजी और उर्दू शब्दों तथा उक्तियों का प्रयोग करते हैं क्योंकि कुछ शब्द शिक्षा के माध्यम से उनमें मिश्रित किये गए, कुछ प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कुछ विज्ञापनों, समाचारों, चलचित्रों के द्वारा l इन शब्दों का प्रभाव हमारे
फिर भी हम सभी ने “धर्म, मत, पंथ और संप्रदाय” नाम के शब्द तो सुने ही हैं लेकिन ये सब हैं क्या? संभवतः इससे हम सभी अभिनज्ञ ही हैं
तो चलो इस विषय को लेकर एक प्रयोग करते हैं :-
सरकारों द्वारा विभिन्न उपक्रमों जैसे बिजली, पानी, एलपीजी सिलिंडर आदि पर चलाये जा रहे कुछ “टेरिफ प्लान” जो अलग अलग राज्यों अलग अलग भाव के हैं जिसमें सीमाएं निर्धारित की हुई हैं कि 1-200 यूनिट तक 200-400 यूनिट और उससे ऊपर, इसी तरह जल का और रसोईघर के गैस सिलिंडर का ! इससे हमें यह लगता है कि इन टैरिफों से बिजली, जल और एलपीजी की खपत कम होगी लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि इसके प्रभाव परिवारों में पड़ते हैं
जैसा की हम जिज्ञासु प्रवृति के लोग जानते ही हैं कि भारत में भारतीय इतिहास को किस प्रकार छुपाया गया है l सत्य के उपासकों के देश भारत में कई सभ्यताए आई और यहीं दफ़न हो गईं किन्तु बीती शताब्दियों में जो सभ्यताएं भारत में आईं वे सभ्यताएं बर्बर थीं उनका उद्देश्य केवल अधिकार करना या राज करना ही नहीं था उनका उद्देश्य किसी भी देश की और वहां के रहने वालों की सभ्यता, संस्कृति और परम्पराओं को नष्ट कर अपनी संस्कृति को वहां के लोगों पर थोपना था, इसके लिए उन्हें जो करना था वह था उस स्थान के लोगों में एक हीन भावना उत्पन्न कर उनको नीचा दिखाना और अपनी श्रेष्ठता दिखा कर उन्हें मतांतरित करना l
गजवा-ए-हिन्द या भारत पर विजय :- इस्लाम की हदीस (सुन्नन नासाई : जिहाद की किताब) और कुछ इस्लामिक विद्वानों द्वारा भारत पर इस्लाम के कब्जे को पैग़म्बर मुहम्मद का एक सपना बताते हैं जिससे मुसलमानों के जन्नत जाने का रास्ता खुलेगा ! इस घोषणा में मुसलमानों और काफिरों के बीच भारत में एक युद्ध होगा जिसमें मुसलमानों की जीत होगी और भारत में इस्लाम का राज कायम हो जाएगा तथा भारत में पूरी तरह से शरिया के कानून (इस्लामिक नियम) लागु होंगे ।
इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमें सबसे पहले महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरु के नेताजी सुभाषचन्द्र बोस से